PUBLICATIONS

This section includes all books and reports published by Manthan Adhyayan Kendra. Soft copies of all publications can be downloaded. For obtaining hard copies of publications details are given at the end of this page.

इस सेक्‍शन में मंथन के प्रकाशनों की – पुस्तकों तथा रपटों की – जानकारी है। इन प्रकाशनों की सॉफ्ट कॉपी डाउनलोड की जा सकती है। उपलब्‍ध प्रकाशनों की छपी हुई प्रतियॉं प्राप्‍त करने की जानकारी भी सेक्‍शन के अंत में दी गई है।


बिहार के राष्ट्रीय अन्तर्देशीय जलमार्ग : एक विवरण

बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, घाघरा, सोन, पुनपुन और कर्मनाशा नदियों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है।बड़े बांधों के बाद जलमार्ग ही शायद हमारी नदियों में सबसे बड़े हस्तक्षेप हैं और इनके कई गंभीर प्रभाव हैं | इस रिपोर्ट में बिहार के इन जलमार्गों का संक्षिप्त परिचय दिया गया है, और इन जलमार्गों से जुड़े महत्व के मुद्दे, चुनौतियाँ और समस्याओं की चर्चा की गयी है |

रपट प्रकाशन : जून  2018.

इस रिपोर्ट का पीडीएफ वर्जन यहॉं से डाउनलोड किया जा सकता है।

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National Inland Waterways in Bihar: A Profile

With the implementation of National Waterways Act, 2016 seven rivers of Bihar, namely Ganga, Kosi, Gandak, Ghaghra, Punpun, Sone, and Karamnasa have been declared as National Inland Waterways. Inland waterway possibly represent the biggest intervention in our rivers, second only to large dams. They are likely to have several serious impacts. This report gives a brief profile of the inland waterways planned in Bihar’s rivers, and lays out important issues, problems and challenges associated with these waterways.

Report, published June 2018.

Read the full report here.

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National and International Inland Waterways in Kosi and Gandak Rivers: A Preliminary Report

With the implementation of National Waterways Act, 2016 seven rivers of Bihar, namely Ganga, Kosi, Gandak, Ghaghra, Punpun, Sone, and Karamnasa have been declared as National Inland Waterways. The Inland Waterways Authority of India (IWAI) has taken up the work on the Kosi, Gandak an Ganga waterways on a priority basis. In April 2018, the Governments of India and Nepal announced that Kosi and Gandak waterway would be extended into Nepal to convert them into international waterways. Given this, Manthan has taken up a detailed study of the Gandak and Kosi waterways, based on a field visit, meetings with officials, local communities and representatives of civil society, as well detailed study of related documents. This Preliminary Report presents the initial findings and recommendations of the study. Since new developments are taking place at a rapid pace, we are studying these and will come with an updated and revised report in due course.

Report, published July 2018.

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राष्‍ट्रीय अंतर्देशीय जलमार्ग स्थिति रिपोर्ट

भारत सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय अंतर्देशीय जलमार्गो की एक महत्वकांक्षी परियोजना को हाथ में लिया है। इसपरियोजना के तहत भारत की 111 नदियों में बड़े और व्यावसायिक अंतर्देशीय जलमार्ग बनाने हैं। बड़े बॉंधों के बाद शायद अंतर्देशीय जलमार्ग नदियों के विनाश के सबसे बड़े कारण के रूप में उभर रहा है।

मंथन और श्रुति की यह नई रपट अंतर्देशीय जलमार्गों से संबंधित मुद्दों की विस्‍तृत विवेचना प्रस्‍तुत करती है। जिसमें जलमार्गो से जुड़े तथ्य, क़ानूनी प्रावधान और उसकी पर्याप्तता, जलमार्ग बनाने और उनके रखरखाव के लिए हस्तक्षेप, इन हस्तक्षेपों का सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक परिणाम शामिल हैं। साथ ही, यह रिपोर्ट इन जलमार्गों की व्यवहार्यता सहित कुछ बुनयादी मुद्दों को उठाती है और कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी देती है। रिपोर्ट पर आपकी टिप्पणियों और सुझावों का स्वागत है।

लेखक: श्रीपाद धर्माधिकारी और जिंदा सांडभोर, हिंदी अनुवाद: योगेन्द्र दत्त, प्रकाशन: मंथन अध्ययन केंद्र और SRUTI, नई दिल्ली.

रपट प्रकाशन : 30 मार्च 2017

इस रिपोर्ट का पीडीएफ वर्जन यहॉं से डाउनलोड किया जा सकता है।

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National Inland Waterways in India: A Strategic Status Report

The Government of India has recently launched the ambitious National Inland Waterways program that plans to convert 111 rivers or river stretches into large commercial waterways. These waterways represent possibly the largest intervention in and  disruption of our rivers, second only to large dams.

This new report examines the scope and extent of the waterways program, its rationale, the legal regime and its adequacy, interventions needed to create and maintain waterways, impacts of these interventions – social, environmental and financial, questions  about the  viability and  desirability of waterways, and raises several key issues and presents suggestions for the way forward.

Authored by Shripad Dharmadhikary  and Jinda Sandbhor, Published by Manthan Adhyayan Kendra and SRUTI, New Delhi. Comments and feedback are welcome.

Report, published 30 March 2017.

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Environmental Violations in and around Coalmines, Washeries and Thermal Power Plants of Tamnar & Gharghoda Blocks, Dist. Raigarh, Chhattisgarh, Report of Fact Finding Team.

A two-member fact finding team comprising of environmental and social researchers Shripad Dharmadhikary and Manshi Asher inquired into the complaints about environmental pollution, loss of land and livelihood and other impacts of coal mines, coal-washeries and thermal power plants in the Tamnar and Gharghoda blocks of Raigarh district of Chhattisgarh. The focus of the team was on impacts related to water. This is a report of the fact finding team.

Report, published November 2016.

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Impacts of Coastal Coal Based Thermal Power Plants on Water : Field visit Report

Costal TPP cover pageCoal based thermal power plants (CTPPs) need water in huge quantities, and hence have a significant impact on water resources in the surroundings. However, it is generally assumed that few such concerns exist with respect to coastal coal based power plants as they use sea water, which is available in virtually unlimited amounts. This is fallacious thinking, because it is based on an understanding that sees the use of water by CTPPs only in arithmetic or algebraic terms. In reality, the impact of CTPPs on water is multi-faceted and based on a multi-dimensional, complex relationship. This report brings out such impacts of coastal thermal power plants based on field visit to several such projects.

Report, published 28 October 2014

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मध्‍यप्रदेश के नगरीय निकायों का जलप्रदाय परिदृश्‍य

MP Ka Nagriya Jalpraday Pridarishya COVER

होशंगाबाद, इटारसी और पिपरिया की छोटे एवं मझौले शहरों की बुनियादी ढॉंचा विकास योजनाऍं (UIDSSMT) के तहत स्‍वीकृत नई जलप्रदाय योजनाओं के अध्‍ययन के आधार पर प्रदेश के जलप्रदाय परिदृश्‍य का मोटा खाका प्रस्‍तुत करने वाली पुस्तिका।

प्रकाशन वर्ष – 2015

इस पुस्तिका की पीडीएफ प्रति डाउनलोड करने के लिए यहॉं क्लिक करें।

छपी प्रति की सहयोग राशि – नि:शुल्‍क। डाक खर्च हेतु 10 रुपए।

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मध्‍यप्रदेश के नगरीय निकायों में जलप्रदाय सुधार

Badwani Booklet Cover-1

जलक्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देने वाली मुख्‍यमंत्री शहरी जलप्रदाय योजना के तहत मार्च 2014 की स्थिति में 977 करोड़ की 72 योजनाओं पर काम जारी है। बड़वानी की योजना के अध्‍ययन से इसके प्रभावों का आंकलन इस पुस्तिका में हैं।

प्रकाशन वर्ष – 2013

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छपी प्रति की सहयोग राशि – 20 रुपए।

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रहिमन पानी बिक रहा सौदागर के हाथ

Rahiman Paani Cover-1

रहिमन पानी बिक रहा सौदागर के हाथ में पानी के निजीकरण से संबंधित बुनियादी मुद्दों का विस्‍तार से वर्णन है। 2003 में प्रकाशित इस पुस्तिका की दूसरी संक्षिप्‍त आवृत्ति का प्रकाशन 2013 में किया गया है।

प्रकाशन वर्ष – 2013

इस पुस्तिका की पीडीएफ प्रति डाउनलोड करने के लिए यहॉं क्लिक करे |

छपी प्रति की सहयोग राशि – 10 रुपए |

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मध्‍यप्रदेश में पानी का निजीकरण खण्‍डवा एवं शिवपुरी की पीपीपी जलप्रदाय योजनाओं के प्रभावों का अध्‍ययन

Cover Khandwa-ShivpuriKhandwa Cover-1 छोटे तथा मझौले नगरों की अधोसंरचना विकास योजना UIDSSMT के तहत मध्यप्रदेश की खण्डवा और शिवपुरी की जलप्रदाय योजनाओं को पीपीपी के तहत निजी कंपनियों को सौंप दिया गया है। योजनाओं के पीपीपी के तहत क्रियांवयन को स्‍थानीय समुदाय ने स्वीकार नहीं किया है तथा वहाँ इसका विरोध जारी है।

प्रकाशन वर्ष – 2013

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छपी प्रति की सहयोग राशि – 30 रुपए (हिन्‍दी संस्‍करण), 40 रुपए (English Version)

To download English Version of Khandwa study, Please click here.

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जल क्षेत्र में जन-निजी भागीदारी,भागीदारी या निजीकरण

PPP Hindi Cover

जल क्षेत्र में जन-निजी भागीदारी भागीदारी या निजीकरण में पानी जैसी आवश्‍यक सार्वजनिक सेवा के निजीकरण से व्‍यवस्‍था संबंधी जिम्‍मेदारी, सेवाप्रदाय और समानता जैसी सामाजिक बाध्‍यताओं पर पीपीपी के प्रभावों का विश्‍लेषण किया गया है। साथ ही बुनियादी ढॉंचा विकास के लिए वर्तमान लागत आंकलन तथा भविष्‍य के लिए प्रस्‍तावित निवेश आदि मुद्दों पर यह पुस्तिका दृष्टि डालती है।

प्रकाशन वर्ष – 2011

इस पुस्तिका की पीडीएफ प्रति डाउनलोड करने के लिए यहॉं क्लिक करें।

छपी प्रति की सहयोग राशि – 75 रुपए

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Public Private Partnerships in Water Sector,Partnership or Privatisation?

Cover1This report looks at various aspects of PPPs, beginning from why PPPs have come to be regarded as the major approach for infrastructure development  in the country, the circumstances that lead to the change in approach from direct privatisation to public-private partnerships especially in the water sector, to the current estimates and projections of investment  requirements for infrastructure development in India by governments and International Financial Institutions (IFIs).

Report, published in 2010

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Support price for hard copy: Rs. 150

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The World Bank as a Knowledge Producer

Knowledge Producer Cover

The World Bank has always been recognised as the biggest research institution working on developmental issues, And it directly intervenes in the policy making processes of the countries to which it lends money. Knowledge clearly is the soft power of the Bank, a power that is as influential as is its money power. This report has put together a picture of the World Bank as a knowledge producer.

Booklet, published in March 2008

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Support price for hard copy: Rs. 100

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Water: Private, Limited: Issues in Privatisation, Corporatisation and Commercialisation of Water Sector in India

Water Pvt Cover SHORTPrivatisation in the water sector is being justified in the name of bringing in new investments and increasing efficiency to address the myriad problems of the water sector. This booklet presents critical issues and concerns related to privatisation, corporatisation and commercialisation of water sector in India.

Booklet, published in January 2007

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Support price for hard copy: Rs. 50

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भाखड़ा परत – दर – परत एक पड़ताल

Bhakhara Hindi Cover-1

भाखड़ा परत-दर-परत एक पड़ताल भाखड़ा बाँध की सिंचाई और खाद्यान्न उत्पादन में उसकी भूमिका की समीक्षा करने का एक प्रयास है जिसमें भाखड़ा के इतिहास के साथ उसके भूगोल पर भी दृष्टि डाली गई है। साथ ही भाखड़ा की अनुपस्थिति में होने वाली संभावित परिस्थिति की समीक्षा भी की गई है।

इसकी प्रतियॉं बुक्‍स फॉर चेंज और मंथन से प्राप्‍त की जा सकती है। पूरी पुस्‍तक का पीडीएफ वर्जन उपलब्‍ध नहीं है। पुस्‍तक के बारे में अधिक जानकारी हेतु यहॉं क्लिक करें।

प्रकाशन वर्ष – 2007

छपी प्रति की सहयोग राशि – 100 रुपए।

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बिक गया इंदौर का पानी

Bik Gaya Indore Ka PaniCover Colorएशियाई विकास बैंक द्वारा मध्‍यप्रदेश को शहरी जलप्रदाय एवं पर्यावरण सुधार नाम से 1365 करोड़ रुपए का एक कर्ज दिया गया था। इस कर्ज के तहत इंदौर, भोपाल, ग्‍वालियर और जबलपुर में जलापूर्ति और तरल-ठोस अपशिष्‍ठ प्रबंधन का काम किया जाना था। इस रिफार्म कर्ज के इंदौर के नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्‍ययन कर मंथन और शिल्‍पी केन्‍द्र (इंदौर) द्वारा यह पुस्तिका प्रकाशित की गई है।

प्रकाशन वर्ष – 2007

छपी प्रति की सहयोग राशि – 5 रुपए। छपी प्रतियॉं फ़िलहाल अनुपलब्‍ध।

इस पुस्तिका की पीडीएफ प्रति डाउनलोड करने के लिए यहॉं क्लिक करें।

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Unravellling Bhakra

Bhakra Cover SHORT

UNRAVELLING BHAKRA is the report of a study of the Bhakra Nangal project carried outover three years from December 2001 to December 2004. This study, 370+ pages, including maps and photos, attempts to look at the broad developmental impacts of the project, in particular its impact and contribution to food security in the country.

Book published in 2005

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Support price for hard copy: Rs. 150 (individual) or Rs. 300 (Institutional)

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सुधार या बाजार

Sudhar Cover SHORTविश्व व्यापार संगठन, विश्‍व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की नीतियों के प्रभाव में जीने के जरूरी संसाधनों पर बाजार को केंद्रित किया जा रहा है ताकि अधिक मुनाफा कमाया जा सके। मध्यप्रदेश में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के 20 करोड़ डाॅलर और विश्व बैंक के 39.6 करोड़ डाॅलर के कर्ज की शर्तों से प्रदेश पर पड़ने वाले प्रभावों का आंकलन इस पुस्तिका में है।

प्रकाशन वर्ष – 2005

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छपी प्रति की सहयोग राशि – 5 रुपए। छपी प्रतियॉं फ़िलहाल अनुपलब्‍ध।

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कस्बे का पानी

BIG-Kasbe Ka Paniमध्यप्रदेश के सुदूर दक्षिण-पश्चिम कोने में बसे अंजड़ कस्‍बे में पीने व निस्तार के पानी की व्यवस्था, स्थिति, समस्या और उनका निराकरण कमोबेश देश के हजारों अन्य कस्बों जैसा ही है। इसलिए इस कस्बे की जलप्रदाय व्यवस्था को आधार बनाकर यह अध्ययन किया गया है ताकि अन्य जगहों की व्यवस्था को समझने में मदद मिले।

प्रकाशन वर्ष – 2003, पुनर्प्रकाशन 2004

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छपी प्रति की सहयोग राशि – 20 रुपए। छपी प्रतियॉं फ़िलहाल अनुपलब्‍ध।

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लेखा-जोखा बड़े बाँधों का

Lekha Cover SHORTप्रचलित सोच के अनुसार हमारे देश ने खाद्यान्न स्वावलंबन का आत्मसम्मान सिर्फ बड़े बाँधों की बदौलत पाया है। ‘विश्व बाँध आयोग’ के लिए जून’ 2000 में तैयार की गई ‘बड़े बाँध: भारत का अनुभव’ नामक रिपोर्ट ने बड़े बाँधों के संदर्भ में इसी प्रकार की कई आम धारणाओं का खुलासा किया है। प्रस्तुत पुस्तिका इसी रिपोर्ट का सार-संकलन है।

प्रकाशन वर्ष – 2001, पुनर्प्रकाशन 2004

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छपी प्रति की सहयोग राशि – 5 रुपए। छपी प्रतियॉं फ़िलहाल अनुपलब्‍ध।

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