Shripad DharmadhikaryDSC01856SMALL

Shripad Dharmadhikary completed his B.Tech in mechanical engineering from IIT Bombay (now Mumbai) in 1985, and after working for few years with industry, become a full-time activist in the Narmada Bachao Andolan (NBA), a mass movement of the people affected by large dams on the Narmada river. In 2001, he relinquished full time work of the NBA to set up Manthan Adhyayan Kendra. Shripad’s work interests include dams, rivers, irrigation, hydropower, privatisation and commodification of water, analysis of water and energy policies, energy-water nexus and environmental flows. He has also completed an online course in environmental flows from UNESCO-IHE.

श्रीपाद धर्माधिकारी

श्रीपाद धर्माधिकारी ने 1985में आई॰आई॰टी॰ मुंबई से मैकेनिकल अभियांत्रिकी में बी॰ टेक॰ डिग्री प्राप्त की। कुछ छोटे उद्योगों के साथ कुछ साल काम करने के पश्चात् वे नर्मदा बचाओ आंदोलन में पूर्णकालीन कार्यकर्ता के रूप में शामिल हुए। नर्मदा बचाओ आंदोलन नर्मदा नदी पर बन रहे बड़े बाँधों से प्रभावितों का जन आंदोलन है। 2001 में श्रीपाद ने नर्मदा आंदोलन के पूर्णकालीन कार्य को छोड़ कर मंथन अध्ययन केंद्र की स्थापना की। नदियाँ, बड़े बाँध, सिंचाई और जल विद्युत परियोजनाएँ, पानी का निजीकरण और बाजारीकरण, जल और ऊर्जा नीतियों का विश्लेषणात्मक अध्ययन, जल-ऊर्जा जुड़ाव, पर्यावरणीय बहाव आदि मुद्दों से उनका काम जुड़ा हुआ है। पर्यावरणीय बहाव विषय में उन्होंने UNESCO-IHE से ऑनलाइन प्रशिक्षण पूरा किया है।


 RehmatRehmat Short

Rehmat, a science graduate, was a full time activist with the Narmada Bachao Andolan (NBA) for 10 years. Rehmat is a Narmada dam project affected person and belongs to village Chikhalda (Distt.-Dhar, MP), which is to be submerged by the Sardar Sarovar dam. After NBA, he underwent training in the design, planning and implementation of water harvesting projects, and was involved in the execution of several such works subsequently. He was initially with Manthan from July 2003 till Dec 2003, and then has been with Manthan since January 2005. Apart from the detailed study of Bhakra project, he has been associated with Manthan’s work on privatisation of water, particularly privatisation of urban water supply.

रेहमत

विज्ञान स्नातक रेहमत सरदार सरोवर बाँध प्रभावित गॉंव चिखल्‍दा (जिला-धार, म॰प्र॰) के निवासी हैं। उनने नर्मदा बचाओ आंदोलन में पूर्णकालीन कार्यकर्ता के रूप में 10 वर्ष काम किया। उसके बाद उन्होंने जल संग्रहण परियेाजनाओं की आयोजना, डिजाईन तथा निर्माण का प्रशिक्षण लिया और ऐसी कुछ परियोजनाओं के निर्माण में शामिल रहे। हैं। वे मंथन के साथ जुलाई 2003 से दिसंबर 2003 तक रहे और जनवरी 2005 से पुनः मंथन से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा भी वे मंथन से अनौपचारिक रूप से जुड़े रहे हैं। भाखड़ा के वृहत अध्ययन कार्य के अलावा वे पानी के निजीकरण खासकर शहरी जलप्रदाय के निजीकरण के मुद्दों भी जुड़े हुए हैं।


DSC07553Jinda Sandbhor

Jinda Sandbhor has completed his Masters in Social Work from Tilak Maharashtra University, Pune in 2009. After that, he interned with the People Centered Advocacy program at National Center for Advocacy Studies(NCAS), Pune in 2010. He has been with Manthan from 2013 and his main area of work is around coal and water. He has also worked with Odisha Resource Center of the Forum for Policy Dialogue on Water Conflicts in India for two years where he also carried out a stakeholder analysis of the Hirakud water conflict. He is closely involved in different social movements of Maharashtra and Odisha.

जिन्दा सांडभोर

जिन्दा सांडभोर ने 2009 में पुणे की तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ से सामाजिक कार्य में स्‍नातकोत्‍तर पढ़ाई पूरी की। इसके पश्‍चात वे पुणे के राष्ट्रीय जन वकालत अध्ययन केंद्र में लोक केन्द्रित वकालत कार्यक्रम में इंटर्न के रूप में रहें। 2013 से जिन्दा मंथन के साथ हैं। इनका मुख्य कार्य कोयला और पानी के अध्ययन से जुड़ा हुआ है। इसके पहले वे Forum for Policy Dialogue on Water Conflicts in India के ओड़िशा राज्य संसाधन केंद्र में कार्यरत रहें और हीराकुड जल विवाद से सम्बंधित कार्य किया। जिन्दा महाराष्ट्र और ओड़िशा के कई सामाजिक आन्दोलनों से जुड़े हुए हैं।